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NEWS NCT DELHI

दिल्ली में आदिवासी समुदाय के साथ 75 साल का अन्याय: सरकार से सवाल, जनगणना में गिनती होगी या फिर शून्य?

By Adivasiduniya
May 26, 2026 3 Min Read
नई दिल्ली, 26 मई 2026 — राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की चमकदार इमारतों, मेट्रो की तेज रफ्तार और आर्थिक गतिविधियों के पीछे छिपा एक गहरा सामाजिक अन्याय है। लाखों आदिवासी (Scheduled Tribes – ST) समुदाय के सदस्य, जो झारखंड, ओड़िशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से यहां आए हैं, दशकों से संवैधानिक रूप से ‘अदृश्य’ बने हुए हैं। 1950 के संविधान लागू होने के बाद से आज तक दिल्ली में किसी भी जनजाति को अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है। नतीजतन, वे ST आरक्षण, कल्याण योजनाओं, शिक्षा में छूट, नौकरियों में आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से पूरी तरह वंचित हैं

यह मुद्दा केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा, समानता और संवैधानिक अधिकारों का है। अनुमान के मुताबिक दिल्ली में संथाल, उरांव, मुंडा, गोण्‍ड, भील, हो, खड़िया और अन्य आदिवासी समुदायों की संख्या 5 लाख से अधिक है। वे निर्माण मजदूरी, सुरक्षा गार्ड, घरेलू कामगार, छोटे ठेले-ठेले वाले व्यवसाय, सफाई कर्मी और असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। लेकिन 2011 की जनगणना में दिल्ली का ST आबादी शून्य (0) दर्ज किया गया। अब 2026-27 की डिजिटल जनगणना में ST विकल्प दिए गए हैं, लेकिन कानूनी अधिसूचना के अभाव में इनका लाभ अनिश्चित है

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 75 वर्षों का सन्नाटा

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत राष्ट्रपति, राज्यपाल की सलाह पर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के लिए जनजातियों को ST के रूप में अधिसूचित कर सकते हैं। संसद इसे बदल या जोड़ भी सकती है। लेकिन दिल्ली, जो 1950 से केंद्र शासित प्रदेश है, के लिए कभी कोई ऐसी अधिसूचना जारी नहीं हुई। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्रों में कोई ST सूची नहीं है, इसलिए वहां ST आबादी आधिकारिक रूप से शून्य मानी जाती है।
1950 के संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश में दिल्ली का जिक्र ही नहीं है। बाद के वर्षों में भी, जब अन्य राज्यों में जनजातियों को शामिल किया गया, दिल्ली को नजरअंदाज रखा गया। 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद दिल्ली में प्रवासी मजदूरों की आमद बढ़ी। बिहार, झारखंड, ओड़िशा से बड़े पैमाने पर आदिवासी युवा यहां आए। वे दिल्ली की अर्थव्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं — गुरुग्राम और नोएडा के निर्माण स्थलों पर, मेट्रो प्रोजेक्ट्स में, होटलों में, घरों में। लेकिन अधिकारों में शून्य।
2011 की जनगणना के अनुसार, दिल्ली की कुल आबादी लगभग 1.67 करोड़ थी, जिसमें ST आबादी 0 दर्ज की गई। जबकि NSSO 2011-12 सर्वे के अनुसार, दिल्ली की 2.5% आबादी खुद को ST मानती है, यानी करीब 5 लाख लोग। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से प्रवासी आदिवासियों को दर्शाता है।
वर्तमान स्थिति: दिल्ली की अर्थव्यवस्था में योगदान, अधिकारों में शून्य
आज दिल्ली और NCR में आदिवासी समुदाय मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में काम करता है। संथाल महिलाएं घरेलू कामगार के रूप में, पुरुष निर्माण साइटों पर। गोण्‍ड और भील समुदाय छोटे व्यापार करते हैं। वे त्योहार मनाते हैं — सरहुल, कर्मा, सोहराई — लेकिन सरकारी मान्यता नहीं।

जनगणना 2026-27: उम्मीद या निराशा?

2026 की डिजिटल जनगणना ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें पहली बार व्यापक जाति जनगणना भी शामिल है। मोबाइल ऐप में ST विकल्प उपलब्ध है। लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि बिना अधिसूचना के ये आंकड़े सिर्फ ‘स्व-घोषणा’ रह जाएंगे, लाभ नहीं दिला सकेंगे। Census 2027 में राज्य-वार ST सूची के आधार पर गिनती होती है। दिल्ली के पास कोई सूची नहीं, इसलिए आंकड़े फिर शून्य आ सकते हैं
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि जनगणना में वास्तविक संख्या दर्ज होती है, तो यह दबाव बनेगा। Ministry of Tribal Affairs (MoTA) से मांग की जा रही है कि अनुच्छेद 342 के तहत दिल्ली के लिए ST सूची अधिसूचित की जाए।

कार्यकर्ताओं के सवाल और मांगें

आदिवासी संगठन जैसे दिल्ली ट्राइबल फोरम, झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (दिल्ली यूनिट) और अन्य ने केंद्र सरकार से सवाल पूछे हैं:
  1. पिछले 75 वर्षों से दिल्ली के लिए कोई जनजाति अधिसूचित न करके सरकार ने इन आदिवासियों को संवैधानिक अधिकारों से क्यों वंचित रखा?
  2. क्या जनगणना में दिल्ली के ST सदस्यों को आधिकारिक रूप से गिना जाएगा, या 2011 की तरह फिर से उनका अस्तित्व मिटा दिया जाएगा?
  3. सरकारी नौकरियों, शिक्षा और योजनाओं में आरक्षण देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?
  4. क्या दिल्ली के लिए ST सूची अधिसूचित करने का कोई प्रस्ताव या समयसीमा है?

मांग है कि दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले आदिवासियों को स्थानीय ST दर्जा मिले, ताकि वे दिल्ली विधानसभा में प्रतिनिधित्व, MCD चुनावों में आरक्षण और विकास योजनाओं का लाभ ले सकें।

pic.twitter.com/QU68n5FpYH

— Dalit Adivasi Duniya (@thedalitadivasi) May 26, 2026

Tags:

ADIVASICENSUS 2027DELHI NEWS
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Adivasiduniya

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