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Home/News Madhya Pradesh/आदिवासी छात्रावासों में अधीक्षक नियुक्ति घोटाले का आरोप, 90% में नियम विरुद्ध प्राथमिक शिक्षकों को प्रभार, कलेक्टर से जांच की मांग
News Madhya Pradesh

आदिवासी छात्रावासों में अधीक्षक नियुक्ति घोटाले का आरोप, 90% में नियम विरुद्ध प्राथमिक शिक्षकों को प्रभार, कलेक्टर से जांच की मांग

May 25, 2026 2 Min Read

मध्य प्रदेश धार। जिला धार में जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावास-आश्रमों में अधीक्षक प्रभार को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर कलेक्टर धार को शिकायत सौंपते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।

क्या हैं मुख्य आरोप ?

  1. 90% छात्रावासों में नियमों का उल्लंघनः – विभागीय निर्देशों के मुताबिक छात्रावास अधीक्षक पद के लिए केवल माध्यमिक शिक्षक या उच्च श्रेणी शिक्षक ही पात्र हैं। आरोप है कि इसके बावजूद जिले के करीब 90% छात्रावासों में प्राथमिक शिक्षकों को अधीक्षक का प्रभार दे दिया गया है। इस मामले में सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग एवं संबंधित BEO की मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।
  2. अंग्रेजी माध्यम आश्रमों में मनमानीः- विभिन्न विकासखंडों के अंग्रेजी माध्यम आश्रमों में ऐसे प्राथमिक शिक्षकों को अधीक्षक बना दिया गया है जिनके पास स्नातक में अंग्रेजी विषय तक नहीं है। जबकि नियम स्पष्ट है कि अंग्रेजी माध्यम आश्रम में अंग्रेजी विषय वाले शिक्षक को ही प्रभार दिया जाए।
  3. 15 साल से जमे हैं संविदा अधीक्षकः वर्ष 2008-09 में भर्ती हुए लगभग 90 संविदा अधीक्षकों का माध्यमिक शिक्षक संवर्ग में संविलियन हो चुका है। नियमानुसार संविलियन के 3 वर्ष बाद इन्हें अधीक्षक प्रभार से मुक्त कर शालाओं में पदस्थ किया जाना था। आरोप है कि BEO द्वारा ‘इनका मूल पद अधीक्षक है’ कहकर जनप्रतिनिधियों को गुमराह किया जा रहा है और इन्हें 15 साल से एक ही स्थान पर जमाए रखा गया है।
  4. 3 साल की समय-सीमा का भी उल्लंघनः – विभागीय निर्देश हैं कि 3 वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर जमे अधीक्षकों को हटाया जाए। आरोप है कि सहायक आयुक्त द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

क्या है मांगः- शिकायत में मांग की गई है कि जिले के सभी छात्रावास/आश्रमों में अधीक्षक प्रभार की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। नियम विरुद्ध पदस्थ प्राथमिक शिक्षकों एवं 3 वर्ष से अधिक समय से जमे सभी अधीक्षकों को तत्काल हटाकर पात्र माध्यमिक/उच्च श्रेणी शिक्षकों को प्रभार दिया जाए। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और 2008-09 के संविलियन वाले अधीक्षकों को शालाओं में भेजा जाए। विभाग का पक्षः इस पूरे मामले में जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया। उनका पक्ष प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा।

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